Chunnu Ji

दादा-दादी दूर हैं? बच्चे के दिन में उनकी आवाज़ रखने के 8 तरीके

बहुत से घरों में आज बच्चे और दादा-दादी के बीच सैकड़ों किलोमीटर हैं, कभी पूरा समंदर। पापा की नौकरी बेंगलुरु या पुणे में है और दादा-दादी लखनऊ या पटना में। या परिवार दुबई, लंदन या न्यू जर्सी में बस गया है और नाना-नानी भारत में हैं। मिलना साल में एक-दो बार ही हो पाता है, गर्मी की छुट्टियों में या दिवाली पर।

ऐसे में मन में यह डर आना स्वाभाविक है कि कहीं बच्चा दादी को सिर्फ़ फ़ोन की स्क्रीन वाले चेहरे के रूप में न जाने। संयुक्त परिवार में दादी की लोरी रोज़ की बात थी; अब उसे थोड़ा सोचकर दिन में लाना पड़ता है।

अच्छी बात यह है कि 1 से 4 साल का बच्चा छोटे-छोटे, बार-बार आने वाले पलों में जीता है: सुबह उठना, खाना, नहाना, सोने से पहले गाना। अगर इन्हीं पलों में दादी की आवाज़, नानी की तस्वीर या दादा जी की कोई कविता बार-बार आती रहे, तो वे बच्चे की रोज़ की दुनिया का हिस्सा बन जाते हैं।

नीचे आठ आसान तरीके हैं; ज़्यादातर में हफ़्ते के कुछ ही मिनट लगते हैं।

1. वीडियो कॉल छोटी रखें, और सही समय पर करें

एक साल का बच्चा 40 मिनट की कॉल पर नहीं बैठेगा, और यह ठीक है। पाँच-दस मिनट काफ़ी हैं, वो भी तब जब बच्चा खा-पीकर ख़ुश हो, नींद से ठीक पहले नहीं। विदेश में हैं तो टाइम-ज़ोन देखकर समय तय करें, जैसे भारत की सुबह, आपकी शाम। दादी को हर बार एक ही छोटा काम दें: वही गाना, वही खिलौना, या वही "राम-राम, मेरे लाल"। बार-बार वही चीज़ होने से बच्चे को पता रहता है कि आगे क्या आएगा।

2. सिर्फ़ फ़ोटो नहीं, एक छोटा वॉइस नोट माँगें

फ़ोटो प्यारी होती है, पर आवाज़ में वो बात है जो तस्वीर में नहीं: दादा जी बच्चे का नाम जिस ख़ास अंदाज़ में पुकारते हैं। दादा-दादी से कहें कि कभी-कभी 20 सेकंड का वॉइस नोट भेज दें, जैसे "सो जा मेरे लाडले, दादी तुझे बहुत प्यार करती है"। इसे रोज़ एक ही समय पर बच्चे को सुनाएँ। फ़ोन चलाना मुश्किल लगे, तो अगली कॉल पर उनकी अनुमति से आप ख़ुद रिकॉर्ड कर लें।

3. घर में "अपनों की आवाज़" वाला छोटा रूटीन बनाएँ

दिन का एक पल चुनें और उसके साथ दादा-दादी की आवाज़ जोड़ दें। नहाते समय नानी का गाना, सुबह दादा जी का "चलो, ब्रश करने का टाइम!"। छुन्नू जी ऐप में माता-पिता या दादा-दादी, पैरेंट गेट के पीछे वाले Parent हिस्से में, कुछ छोटी लाइनें रिकॉर्ड करते हैं, और फिर ऐप के खेल उसी परिवार की आवाज़ में बोलते हैं। मसलन परिवार को कॉल वाला खेल एक खेल-खेल वाली कॉल है, जिसमें जानी-पहचानी आवाज़ हैलो कहती है। यह असली फ़ोन कॉल नहीं है, और कोई बड़ा पास ही बैठा रहता है।

4. ऐसा फ़ोटो एल्बम जिस पर बच्चा उँगली रख सके

बच्चों को चेहरे पहचानना भाता है। कुछ तस्वीरें प्रिंट करें या फ़ोन में छोटा-सा एल्बम बनाएँ, और शांत पलों में पूछें: "दादी कहाँ हैं? नाना जी कौन-से हैं?" छुन्नू जी की परिवार की तस्वीरों की दुनिया में आप वे चेहरे जोड़ सकते हैं जिन्हें बच्चा प्यार करता है, ताकि वे खेल के अंदर दिखें। शादी की ग्रुप फ़ोटो की जगह पास से ली गई, मुस्कुराते चेहरे वाली साफ़ तस्वीर चुनें।

5. उनकी अपनी बोली की कोई लोरी या कविता रिकॉर्ड करें

दादी-नानी के पास वो गाने होते हैं जो हमें आधे-अधूरे याद हैं: "चंदा मामा आरे आवा, पारे आवा", "मछली जल की रानी है", या घर की बोली की कोई पुरानी लोरी, चाहे भोजपुरी हो, अवधी या राजस्थानी। उनसे कहें कि एक लोरी धीरे-धीरे गाएँ, और आप उसे रिकॉर्ड कर लें। बच्चा विदेश में बड़ा हो रहा हो, तब भी दादी की लोरी उसे परिवार की बोली से जोड़े रखती है। सोते समय गानों के लिए हमारी परिवार की लोरियाँ गाइड देखें।

6. दादा-दादी को हफ़्ते का एक "काम" दें

दूर बैठे दादा-दादी को लग सकता है कि वे बस देखने वाले रह गए हैं। उन्हें एक छोटा, नियमित काम दें: रविवार की कहानी, "इस हफ़्ते का जानवर" चुनना, या हर हफ़्ते एक नया शब्द भेजना। फिर घर में खेलते समय वही शब्द या जानवर इस्तेमाल करें: "दादा जी ने कहा था, इस हफ़्ते हाथी!" इससे बच्चे को दादा-दादी और असल ज़िंदगी के बीच एक कड़ी मिलती है, और दादा-दादी को अपनी भूमिका।

7. स्क्रीन को उसकी जगह पर रखें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2019 के दिशानिर्देशों के मुताबिक़ एक साल के बच्चे के लिए बैठे-बैठे स्क्रीन देखना सुझाया नहीं जाता, और 2 से 4 साल के बच्चों के लिए दिन में एक घंटे से ज़्यादा नहीं, कम हो तो और अच्छा। WHO बड़ों के साथ पढ़ने और कहानी सुनने को बढ़ावा देता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (AAP) 18 महीने से छोटे बच्चों के लिए परिवार से वीडियो चैट को अपवाद मानती है, पर तब भी कॉल छोटी ही बेहतर है। वॉइस नोट, रिकॉर्ड की हुई लोरी या स्क्रीन बंद करके सुनी जाने वाली गतिविधि बिना ज़्यादा स्क्रीन के दादा-दादी को घर में ले आती है।

8. मिलने से पहले तैयारी, और जाने के बाद यादें

दादा-दादी के आने से कुछ दिन पहले रोज़ उनकी फ़ोटो दिखाएँ और आवाज़ सुनाएँ, ताकि मिलना अनजाना न लगे। जब वे घर पर हों, उनकी अनुमति से रोज़ की कुछ लाइनें रिकॉर्ड कर लें: "उठ गया मेरा राजा बेटा?", "शाबाश!", "अब आराम से सो जाओ"। उनके लौटने के बाद भी ये लाइनें दिन का हिस्सा बनी रहती हैं, और एयरपोर्ट की विदाई के साथ उनकी आवाज़ विदा नहीं होती।

निजता और अनुमति की एक बात

दादा-दादी की आवाज़ उनकी अपनी है। सिर्फ़ अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करें, या परिवार के किसी सदस्य की आवाज़ उनकी अनुमति से। छुन्नू जी में रिकॉर्डिंग फ़ोन में ही रहती है, ऐप उसे अपलोड नहीं करता, और सेटअप के बाद ऐप बिना इंटरनेट चलता है। उसी आवाज़ में नई लाइनें बनाने के लिए सपोर्टेड फ़ोन चाहिए (64-bit Android, कम से कम 5.5 GB RAM, 2.2 GB खाली जगह); दूसरे फ़ोन पर रिकॉर्ड की हुई लाइनें ही बजती हैं। हो सकता है बनी हुई आवाज़ हूबहू असली व्यक्ति जैसी न लगे।

परिवार को और पास लाएँ

अगर आप चाहते हैं कि बच्चा खेलते हुए दादी, दादा, मम्मी और पापा की आवाज़ सुने, तो Chunnu Ji को Google Play पर पाएँ। यह मुफ़्त में शुरू होता है, इसमें कोई विज्ञापन नहीं है, और यह 1–4 साल के बच्चों के लिए माता-पिता के साथ मिलकर खेलने को बना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दूर रहने वाले दादा-दादी छोटे बच्चे से कैसे जुड़ें?

कभी-कभार की लंबी कॉल से बेहतर है छोटा, नियमित संपर्क: रोज़ का एक वॉइस नोट, हफ़्ते का एक गाना और हर बार एक जैसा अभिवादन।

1 साल के बच्चे से वीडियो कॉल कितनी देर की हो?

लगभग पाँच से दस मिनट, दिन के किसी शांत समय पर। बच्चा ख़ुश रहते ही कॉल ख़त्म करें।

क्या दादा-दादी की आवाज़ रिकॉर्ड करना ठीक है?

हाँ, उनकी अनुमति से। उन्हें बताएँ कि आप क्या रिकॉर्ड करेंगे और उसका कैसे इस्तेमाल होगा। छुन्नू जी में भी यही नियम है: सिर्फ़ अपनी आवाज़, या परिवार के सदस्य की आवाज़ उनकी सहमति से।

क्या छुन्नू जी को परिवार की आवाज़ें चलाने के लिए इंटरनेट चाहिए?

ऐप इंस्टॉल करने और सेटअप पूरा करने के लिए इंटरनेट चाहिए। सेटअप के बाद गतिविधियाँ बिना इंटरनेट चलती हैं, और आवाज़ें फ़ोन में ही रहती हैं।